गिरते रुपये को सहारा देने के लिए केंद्रीय बैंक आरबीआई मैदान में उतर गया है। उसने बैंकों से प्रवासी भारतीयों के जरिए FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम के तहत ज्यादा से ज्यादा विदेशी फंड जुटाने को कहा है। इससे डॉलर वापस फिर से देश में लौट सकेगा।
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में डॉलर की आवक बढ़ाने और रुपये को मजबूती देने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने हाल में देश के बड़े सरकारी और निजी बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ एक बैठक में विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रयासों को तेज करने का निर्देश दिया है। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार आरबीआई ने बैंकों से प्रवासी भारतीयों (NRIs) के जरिए FCNR(B) यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) डिपॉजिट स्कीम के तहत ज्यादा से ज्यादा विदेशी फंड जुटाने को कहा है।
बैठक की जानकारी रखने वाले बैंकरों के मुताबिक, रिजर्व बैंक ने बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है कि इस समय देश को विदेशी मुद्रा की सख्त जरूरत है। आरबीआई के इस रुख के बाद लगभग सभी बड़े बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में 200 से 300 बेसिस पॉइंट्स (bps) का इजाफा कर दिया है। अब बैंकों की ओर से 3 से 5 साल के FCNR(B) डिपॉजिट पर 5.25% से 7.1% तक ब्याज ऑफर किया जा रहा है। इस स्कीम का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि आरबीआई खुद पूरी हेजिंग कॉस्ट का बोझ उठा रहा है, जिससे बैंकों के लिए यह सौदा बेहद फायदेमंद हो गया है।
