भूमध्य रेखा के समीप प्रशांत महासागर में फिलहाल अल नीनो की स्थितियां बन गई हैं तथा दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान इनके और अधिक मजबूत होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा कि समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि पर वायुमंडल ने प्रतिक्रिया दी है और महासागर-वायुमंडल की संयुक्त प्रणाली अब अल नीनो स्थितियों के अनुरूप विशेषताएं दिखा रही है।
टोक्यो: भारतीय मौसम विभाग ने बताया है कि भूमध्य रेखा के समीप प्रशांत महासागर में फिलहाल अल नीनो की स्थितियां बन गई हैं। इससे भारत में मॉनसून की बारिश कम होने और सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका समेत कई देशों की मौसम एजेंसियों ने अल नीनो के आने की भविष्यवाणी की थी। ऐसी आशंका है कि इसका असर अगले साल तक रह सकता है। यह मौसमी घटना पहले भी सूखे, बारिश की कमी और गर्म व शुष्क मौसम से जुड़ी रही है। इसलिए, इसका वापस आना भारत के लिए चिंता का विषय है जहां लाखों लोग गर्मी से राहत पाने और फसल उगाकर आजीविका चलाने के लिए मॉनसून की बारिश पर निर्भर हैं।
मौसम वैज्ञानिक समुद्र की एक और घटना पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं जो हालात को संतुलित करने में मदद कर सकती है। इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के नाम से जानी जाने वाली यह मौसमी घटना पहले भी अल नीनो के बुरे असर को कम कर चुकी है और भारत को मॉनसून में भारी कमी से बचा चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इंडियन ओशन डाइपोल क्या है और यह मॉनसून की कैसे मदद कर सकता है।
