गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर तक प्रस्तावित नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर को लेकर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक यात्रा का समय कम होने और कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर परिवहन सुविधाओं का सीधा असर आसपास के इलाकों के रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ता है। नमो भारत कॉरिडोर बनने से गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे क्षेत्रों में रोजगार, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
क्या बढ़ सकती हैं प्रॉपर्टी की कीमतें?
नई हाई-स्पीड कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आमतौर पर आवासीय और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग बढ़ती है। जेवर एयरपोर्ट के आसपास पहले से ही इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट तेज हो रहा है। ऐसे में नमो भारत कॉरिडोर से जुड़े इलाकों में लंबे समय में प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, कीमतों में वास्तविक वृद्धि प्रोजेक्ट की प्रगति, आसपास के विकास, रोजगार के अवसर और बाजार की मांग पर निर्भर करेगी।
160 kmph तक की रफ्तार से दौड़ने की योजना
प्रस्तावित RRTS कॉरिडोर का उद्देश्य तेज और आरामदायक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। हाई-स्पीड नमो भारत सेवा से यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने में आसानी होगी और गाजियाबाद समेत एनसीआर के कई इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट और नमो भारत जैसे बड़े प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में एनसीआर के विकास का नया केंद्र बना सकते हैं।
गाजियाबाद को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से जोड़ने के लिए प्रस्तावित नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर की डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार की जा रही है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक का सफर करीब 50 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है।
इस हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रियों, स्थानीय निवासियों और कारोबारियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके साथ ही लंबे समय में आसपास के क्षेत्रों में रोजगार, व्यापार और रियल एस्टेट विकास को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
72 किलोमीटर लंबा होगा कॉरिडोर
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना पर लगभग 20,640 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह करीब 72 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर होगा, जिसमें लगभग 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और YEIDA (यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) क्षेत्र को सीधे जेवर एयरपोर्ट से जोड़ेगा।
प्रस्तावित नमो भारत ट्रेन की रफ्तार करीब 180 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है, जिससे यात्रा का समय काफी कम होगा। यह कॉरिडोर दिल्ली मेट्रो, नोएडा मेट्रो और अन्य नमो भारत नेटवर्क से जुड़ने की योजना है, जिससे एनसीआर में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

किन इलाकों को मिल सकता है फायदा?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, एयरपोर्ट और हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के आसपास के क्षेत्रों में आमतौर पर निवेशकों और होम बायर्स की रुचि बढ़ती है।
इस प्रोजेक्ट से संभावित रूप से इन क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है:
- गाजियाबाद: बेहतर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से यहां रहने और निवेश की मांग बढ़ सकती है।
- नोएडा और ग्रेटर नोएडा: पहले से विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण नए निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
- YEIDA क्षेत्र: जेवर एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और नए विकास प्रोजेक्ट्स के कारण यह क्षेत्र लंबे समय में महत्वपूर्ण बन सकता है।
क्या बढ़ेंगी प्रॉपर्टी की कीमतें?
कार्यन ग्रुप के निदेशक वरुण गर्ग के अनुसार, ऐसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से बाजार में सकारात्मक भावना बनती है। बेहतर कनेक्टिविटी से जमीन, आवासीय प्रोजेक्ट और कमर्शियल संपत्तियों की मांग बढ़ सकती है।
हालांकि, सिर्फ प्रोजेक्ट की घोषणा के आधार पर तुरंत प्रॉपर्टी खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले यह देखना जरूरी है कि:
- प्रोजेक्ट का निर्माण कब शुरू होगा और कब पूरा होगा।
- प्रस्तावित स्टेशन किस इलाके में आएंगे।
- आसपास का वास्तविक विकास कितना हो रहा है।
- जमीन या प्रॉपर्टी की कीमत बाजार के हिसाब से उचित है या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट और नमो भारत कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट एनसीआर के विकास को नई दिशा दे सकते हैं, लेकिन निवेश का फैसला पूरी जानकारी और लंबी अवधि की योजना के आधार पर ही लेना चाहिए।