AI के लिए भारत तेजी से उभरता हुआ बाजार है। हालांकि, वर्ल्ड बैंक के डायरेक्टर का कहना है कि अमेरिका और चीन के मुकाबले भारत एआई की रेस में पीछे है। उन्होंने कुछ चुनौतियों का जिक्र किया है, जिसे पार पाने के बाद भारत एआई की रेस में बना रह सकता है। AI की रेस में भारत में पिछले कुछ समय में तेजी से काम हुआ है। हालांकि, अभी भी भारत को चीन और अमेरिका जैसे एआई के सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे बाजार से मुकाबला करना है। हालांकि, इसके लिए भारत को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। पिछले दिनों वर्ल्ड बैंक के डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने बताया कि किस तरह भारत AI की रेस में चीन और अमेरिका जैसे देशों के साथ मुकाबला कर सकता है। ये दोनों देश एआई मॉडल से लेकर एडवांस चिप डेवलप कर रहे हैं। इनका मुकाबला करने के लिए भारत को कुछ रणनीतिक बदलाव करने पड़ेंगे।
ANI से बात करते हुए नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि भारत की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि यहां कितने एडवांस AI मॉडल बनाए जाएं, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बड़े पैमाने पर AI का इस्तेमाल किस तरह व्यवस्थागत समस्याओं को सुलझाने के लिए किया जाए। खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर बनाने के मामले में भारत फिलहाल वैश्विक लीडर्स से पिछड़ सकता है, लेकिन देश के पास कई ऐसे सेक्टर हैं, जहां की समस्याओं को सुलझाने के लिए एआई का इस्तेमाल व्यापक तौर पर किया जा सकता है।
