नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार जारी तेजी भारत के राजकोषीय प्रबंधन और बाहरी व्यापार संतुलन के लिए नई चुनौती बन सकती है। वित्त मंत्रालय ने अपनी ताजा रिपोर्ट में आगाह किया है कि ऊर्जा लागत बढ़ने से देश के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर दोबारा दबाव बढ़ सकता है।
वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर राजकोषीय घाटे और चालू खाता संतुलन दोनों के वित्तपोषण पर पड़ सकता है।
