अमेरिका समेत पश्चिमी देशों और यूरोपीय संघ ने रूसी तेल पर बैन लगाया है। वहीं एक लूपहोल के कारण रूसी तेल से बने प्रोडक्ट उन्हीं देशों में बिक रहे हैं, जिन्होंने बैन लगाया है। ये प्रोडक्ट भारत में भी बन रहे हैं।
नई दिल्ली: रूसी कच्चे तेल पर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों और यूरोपीय संघ (EU) ने कड़े बैन लगाए हैं। वहीं इन कड़े प्रतिबंधों और एम्बार्गो (आयात प्रतिबंध) के बावजूद एक बड़ा लूपहोल सामने आया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की ताजा रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि प्रतिबंध लगाने वाले देशों को सीधे तेल न बेच पाने के बाद भी, रूसी तेल अन्य देशों की रिफाइनरियों के जरिए प्रोसेस होकर घूम-फिरकर वापस उन्हीं देशों के बाजारों में पहुंच रहा है।
मई 2026 में भारत, तुर्की, ब्रुनेई और जॉर्जिया जैसे देशों ने रूसी कच्चे तेल को रिफाइन कर बड़े पैमाने पर उन देशों को पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किए हैं, जिन्होंने खुद रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं। अमेरिका समेत पश्चिमी देशों और यूरोपीय संघ को पेट्रोलियम प्रोडक्ट बेचने में भारत ने भी रूस की मदद में योगदान दिया।
